लाफिंग बुद्धा का रहस्य (Secret of Laughing Buddha)

लाफिंग बुद्धा का अर्थ हुआ हसता हुआ बुद्ध | यहाँ पे हमे ये समझ लेना होगा जिस बुद्ध की छवी से हम परिचित है उससे ये भिन्‍न् है| बुद्ध को हम एक ऐतिहासिक चरित्र के रूप मे हम जानते है वास्तव मे बुद्ध का अर्थ कुछ और है | बुद्ध एक व्यक्ति विशेष का नाम नही है बुद्ध एक अवस्था का नाम है | बुद्ध का वास्तविक अर्थ है जो जाग गया है |

विश्व मे बहुत से बुद्ध हुए, इसी तरह जापान मे एक बुद्ध हुए होतेई | जैसे ही होतेई को आत्मशाक्षात्कर हुआ वो निद्रा से जागे और जागकर हसने लगे और आजीवन् हॅसते रहे | वो एक गाँव से दूसरे गाँव जाते और उनकी इस हंसी को देखकर सब विस्मय मे पड जाते | जापान के लोग उन्हे हसता हुआ बुद्ध कहकर बुलाने लगे | वे बीच बाजार मे खड़े होकर जोर जोर से हॅसते औए इस प्रकार उनका नाम पूरे जापान मे फैल गया | लोग होतेई के आने की प्रतिक्षा किया करते थे | उनके पास देने के लिये कोई प्रवचन ये उपदेश नही था लोगो के भीड़ उनके पास एकत्रित होती और होतेई का साथ पूरा भीड़ हसने लगता |

पर लोग उनसे कुछ और जानने और समझने की जिद करने लगे | तब होतेई ने कहा मेरे पास अब कुछ बताने की लिये बचा नही | तुमलोग नाहक ही रोते रेहते हो | तुम लोगो को एक मूर्ख की आवश्यकता है जिस पर तुम सब हस सको | यही मेरा संदेश है की तुमलोग जी भर के हंसो | इस संसार मे कुछ भी अपूर्ण नही है इसीलिये हंसो | तुम्हारा यों रोना और शोर मचाना व्यक्तिगत समस्या है | पूरी सृष्टि हंस रही है चन्द्रमा, तारे, पक्षिया, फूल, पौधे सब हंस रहे है और तुम रोए चले जा रहे हो | अपने आंखे खोलो – जागो और हंसो यही मेरा संदेश है और कुछ नही |

उनका परिव्राजक की तरह घूमना जारी रहा और ऐसा कहा जाता है की उन्होने पूरे जापान को हँसाया | लोग उनके सान्निध्य मे रहकर हसने लगे | यही होतेई का ध्यान था यही उनकी समाधी थी | धीरे धीरे लोगो को समझ मे आया की वो बिना किसी कारण भी हंस सकते है और इसके द्वारा शांती का अनुभव किया जा सकता है | ये एक अलग पर बहुत ही कारीगर ध्यान का मार्ग था |

कारण की खोज मूर्खता है जब तक हमे कारण नही मिलेंगे क्या हम हंस नही सकते ? अगर आप ये सोचते है कि कारण आपको सुख या आनंद दे सकता है तब आप कभी भी सुखी नही हो सकते | कारणो की खोज करते करते हम और भी अधिक दुखी हो जाएंगे | ये कारण तो दुख से जुड़ा हुआ है और आनंद तो हमारा स्वभाव है | हम दुख का निर्माण करते है जबकि सुख हरसमय विद्यमान है | 

“Laughing Buddha” की मूर्ति एक प्रतीक मात्र है अगर आप बिना कारण आनंदित हो सकते है तो सुख और ऐश्वर्य आपके पास स्वतः चलके आयेगी |

 

 

आध्यात्म (Spirituality)

Leave a Reply