Category / कविताएं (Poetries)

  • दिल ही तो है न संग-ओ-खिश्त दर्द से भर न आये क्यों? रोयेंगे हम हज़ार बार, कोइ हमें सताए क्यों? दैर नहीं, हरम नहीं, दर नहीं, आस्तां नहीं बैठे हैं रहगुज़र पे हम, ग़ैर हमें उठाये क्यों? क़ैद-ऐ-हयात-ओ-बंद-ऐ-ग़म अस्ल में दोनों एक हैं मौत से पहले आदमी ग़म से निजात पाए क्यों? हाँ वो नहीं […]

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  • आह को चाहिए इक उम्र असर होने तक कौन जीता है तेरी ज़ुल्फ़ के सर होने तक। आशिक़ी सब्र-तलब और तमन्ना बेताब दिल का क्या रंग करूँ ख़ून-ए-जिगर होने तक। हम ने माना कि तग़ाफुल न करोगे लेकिन ख़ाक हो जाएँगे हम तुमको ख़बर होने तक। ग़म-ए-हस्ती का ‘असद’ किस से हो जुज़ मर्ग इलाज […]

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