• दिल ही तो है न संग-ओ-खिश्त दर्द से भर न आये क्यों? रोयेंगे हम हज़ार बार, कोइ हमें सताए क्यों? दैर नहीं, हरम नहीं, दर नहीं, आस्तां नहीं बैठे हैं रहगुज़र पे हम, ग़ैर हमें उठाये क्यों? क़ैद-ऐ-हयात-ओ-बंद-ऐ-ग़म अस्ल में दोनों एक हैं मौत से पहले आदमी ग़म से निजात पाए क्यों? हाँ वो नहीं […]

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  • आह को चाहिए इक उम्र असर होने तक कौन जीता है तेरी ज़ुल्फ़ के सर होने तक। आशिक़ी सब्र-तलब और तमन्ना बेताब दिल का क्या रंग करूँ ख़ून-ए-जिगर होने तक। हम ने माना कि तग़ाफुल न करोगे लेकिन ख़ाक हो जाएँगे हम तुमको ख़बर होने तक। ग़म-ए-हस्ती का ‘असद’ किस से हो जुज़ मर्ग इलाज […]

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  • हममे से बहुत लोगो ने सुना होगा कि ताँबे के बर्तनो मे पानी पीना चाहिये | हमारे दादा परदादा अक्सर ताँबे के लोटे मे पानी पिया करते थे यहाँ तक कि पुराने समय मे बड़े बड़े ताँबे के घड़े पानी रखने के लिये उपयोग मे लाये जाते थे | ताँबे के पात्रो मे पानी रखने […]

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  • यह कहना अतिशियोक्ति नही होगा की सूर्य ही पृथ्वी पर जीवन का कारण है | सूर्य हमे ना केवल प्रकाश और उष्मा देता है बल्कि साथ साथ वो जरूरी ऊर्जा भी प्रदान करता है जिससे हमे आक्सीजन और भोजन मिलता है | जरा सोचिये अगर सूर्य का अस्तित्व ना रहे या सूर्य ठंडा पड जाये […]

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  • लाफिंग बुद्धा का अर्थ हुआ हसता हुआ बुद्ध | यहाँ पे हमे ये समझ लेना होगा जिस बुद्ध की छवी से हम परिचित है उससे ये भिन्‍न् है| बुद्ध को हम एक ऐतिहासिक चरित्र के रूप मे हम जानते है वास्तव मे बुद्ध का अर्थ कुछ और है | बुद्ध एक व्यक्ति विशेष का नाम नही […]

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